गर्मियों में शिशु को कैसे रखें ठंडा-ठंडा कूल-कूल

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गर्मियों में सबसे अधिक अगर कोई परेशान होता है तो वो हैं बच्चे. छोटे बच्चे कुछ कह भी नहीं सकते हैं कि कोई उनकी बात समझ पाए. इसीलिए हमे सबसे ज्यादा ध्यान छोटे बच्चों पर ही देना पड़ता है. तो इन गर्मियों बच्चों का कैसे रखें ख्याल, आइये जानते हैं.

शिशु के लिए ऐसे कपड़े चुने जो उसे गर्मियों में आरामदायक रखने में मदद कर सकते हैं.  विशुद्ध सूती कपड़े, सिंथेटिक फाइबर जैसे कि नायलॉन, पॉलिएस्टर, रेयान से बने कपड़ों की तुलना में अधिक पसीना सोखते हैं परिणामस्वरूप जब शिशु को पसीना आता है तो सूती कपड़े नमी को सोख लेते हैं और इसे सूखने देते हैं, वहीं सिंथेटिक फाइबर से बने कपड़े ऐसा नहीं करते. यदि शिशु की त्वचा लंबे समय तक गीली रहेगी तो उसे घमौरी होने की संभावना बढ़ सकती है. साथ ही बच्चों को हलके रंगों के कपडे ही पहनायें. गहरे रंग गर्मी सोखते हैं जबकि हलके रंग ठन्डे होते हैं और गर्मी से बचाव करते हैं. बच्चों को धुप में ले जाते वक़्त पूरी बाजू के ही कपडे पहनायें. शिशु को धुप में ले जाते हुए चौड़े रिम वाली हैट या टोपी पहनायें.

धुप के चरम समय में शिशु को बाहर न ले जाएँ. अगर संभव हो, तो कोशिश करें कि दिन में जब गर्मी का असर सबसे ज्यादा हो, तब आप घर के अंदर ही रहें. शिशु को सुबह-सुबह या फिर देर शाम को सैर के लिए ले जाएं. अगर आपको धूप में निकलना ही पड़े, तो शिशु को प्रैम (बग्गी) या बेबी कैरियर में लिटाने से पहले एक सूती चादर बिछा लें. सूती चादर प्रैम के सिंथेटिक कपड़े से शिशु की त्वचा को बचा के रखेगी. साथ ही साथ यह शिशु का पसीना सोखकर उसे सूखा और आरामदायक रखेगी.

दिन में कुछ समय शिशु को बिना नैपी के रखें. इससे उसके अंगों को पर्याप्त हवा लग सकेगी और पसीने से होने वाले रशेस और खुजली नही होगी. हालाँकि जितना ज्यादा समय आप शिशु को ऐसे रखेंगी उतनी ही अधिक आपको सफाई भी करनी पड़ सकती है. जब आपका शिशु दूध पीने और सोने की दिनचर्या में ढल जाएगा, तब आप देखेंगी की वह नियमित रूप से पेशाब और मल त्याग भी कर रहा है. इसलिए शिशु को ऐसे रखने के लिए उसके जागने का समय चुनें.

अपने शिशु को पर्याप्त पानी पिलायें. शिशु नहीं बता सकते कि उनको कब प्यास लगी है. इसके लिए आप शिशु को हर घंटे-दो घंटे में थोडा पानी पिलाती रहे. ये जाने के लिउए कि आपका शिशु पर्याप्त पानी पी रहा है या नहीं, शिशु के मूत्र का रंग देखें. अगर उसका मूत्र पीलापन लिए है और वो दिन में 7-8 से कम नैपी गीली कर रहा है तो आपको शिशु को अधिक पानी पिलाने की ज़रूरत है. हालाँकि 6 महीने से कम के शिशु को पानी पीने की ज़रूरत नहीं होती, उसके लिए स्तनपान ही पर्याप्त होता है.

 

 

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